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Friday, October 5, 2018

What is CCC Computer Course Hindi - सीसीसी कंप्‍यूटर कोर्स क्‍या है

What is CCC Computer Course - सीसीसी कंप्‍यूटर कोर्स क्‍या है 
सीसीसी की FullForm है कोर्स ऑन कम्प्यूटर कॉन्सेप्ट (Course on Computer Concepts) विभिन्न सरकारी नौकरियों में Nielit (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) ने सीसीसी (कोर्स ऑन कम्प्यूटर कॉन्सेप्ट्स) सर्टिफिकेट को अनिवार्य कर दिया है ऐसे में लाखों लोग कम्प्यूटर सीखना चाहते है और सीसीसी कोर्स करना चाहते हैं तो आईये जानते हैं 

सीसीसी कोर्स राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा चलाया जाता है जिसे नाइलिट के नाम से भी जाना जाता है, NIELIT के द्वारा सीसीसी परीक्षा और बीसीसी परीक्षा पूरे वर्ष हर माह आयोजित कराई जाती है, सीसीसी को कम्प्यूटर अवधारणा पाठ्यक्रम और बीसीसी को मूलभूत कम्प्यूटर पाठ्यक्रम कहा जाता है, NIELIT से पहले सीसीसी कोर्स और बीसीसी कोर्स DOEACC द्वारा करायेे जाते थेे लेकिन अब सीसीसी कोर्स नाइलिट द्वारा आयो‍जित कराये जाते हैं सीसीसी कोर्स को करने से आपको Computer की बेसिक जानकारी हो जायेगी जो किसी भी सरकारी और प्राइवेट नौकरी के लिये जरूरी होती है


निम्नलिखित राज्यों ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भर्ती तथा पदोन्नति के प्रयोजन से ‘सीसीसी’ पाठ्यक्रम को मान्यता प्रदान की है।
·                     गुजरात
·                     महाराष्ट्र
·                     उत्तर प्रदेश
·                     अरुणाचल प्रदेश

कैसे करें सीसीसी कोर्स 

·                     शैक्षिक योग्‍यता - किसी शैक्षिक योग्यता पर ध्यान नहीं दिया जाएगा
·                     परीक्षा फीस - 600/- रु. (580/- रु. परीक्षा फीस + 20/- प्रकिया प्रभार)
·                     परीक्षा समय - हर माह के प्रथम शनिवार को आयोजित होती है 
·                     परीक्षा स्‍थल - नाइलिट द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत स्थानों द्वारा 
·                     कोर्स की अवधि - 80 घंटे 
CCC कोर्स को आप 2 तरह से कर सकते है पहला ऐसे संस्थानों द्वारा जिन्हें सीसीसी पाठ्यक्रम चलाने के लिए नाइलिट द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है। इस संस्थानों द्वारा सीसीसी परीक्षा का आयोजन नाइलिट (पूर्व में डीओईएसीसी सोसायटी) द्वारा निर्धारित कैलेण्डर के अनुसार किया जाता है, यह परीक्षा हर माह के प्रथम शनिवार को इन संस्थानों पर आयोजित कराई जाती है

दूसरा तरीका है कि आप स्‍वंय तैयारी करें और अपने घर पर ऑनलाइन परीक्षा दें .इसके लिए आपको CCC की वेबसाइट student.nielit.gov.in पर जाना होगा और CCC कोर्स के एग्जाम के लिए Ccc Course Online Registration कराना होगा और स्वयं अध्ययन के आधार पर कोर्स का ऑनलाइन एग्जाम देना होगा

C.C.C Course Syllabus 

·                     कम्प्यूटर का परिचय (Introduction To Computer)
·                     जीयूआई आधारित ऑपरेटिंग सिस्‍टम परिचय (Introduction To GUI Operating System)
·                     शब्द संसाधन के तत्व (Elements of word processing)
·                     स्प्रेडशीट (Spreadsheets)
·                     कम्प्यूटर संचार एवं इंटरनेट (Computer communication and internet)
·                     WWW तथा वेब ब्राउज़र (WWW and web browser)
·                     संचार एवं सहयोग (Communication and cooperation)
·                     छोटे प्रस्तुतीकरण का निर्माण (Creation of small presentations)

परीक्षा देने के बाद आप परिणाम डाउनलोड करने के लिए student.nielit.gov.in पर जा सकते हैं, साथ ही आपको डिजिटल रूप में हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र भी दिया जायेगा जिसे डाउनलोड करने के लिए विद्यार्थी http://www.nielit.gov.in/certificate/ पर जा सकते हैं

क्‍या होते हैं वायरस और एन्‍टी वायरस

What is virus in Computers

वायरस बहुत माहिर साफ्टवेयर प्रोग्रामों दवारा कुछ ऐसे साफ्टवेटर डिजाइन किये जाते है। जो किसी भी कम्प्यूटर में प्रवेश कर सकते है तथा उसके डाटा को खराब कर सकते है और कुछ ही समय में आपके कम्प्यूटर पर कब्जा कर लेते है ओैर विन्डो को खराब या करप्‍ट कर देते है। एन्टीवाइरस कम्प्यूटर में इस्‍टाल करने से वह कम्प्यूटर के अन्दर छिपे वाइरस को ढूढता लेता है उसे क्लीन कर देता है।

What is Antivirus and How it works

एन्टीवाइरस के पास सभी वाइरसों नामों की एक लिस्ट होती है जब हम उसको इंस्टाल करते है वो वह अपनी लिस्ट से वाइरसों के नामों को मैच करता है और मैच हो जाने पर वह उन्हें डिलीट कर देता है एन्टीवाइरस अच्छी तरह से काम करे इसके लिए जरूरी है कि उसे इन्टरनेट के माध्यम से उसे डेली अपडेट किया जाए।
How to Protect Computer from viruses

वायरस से बचाव:- किसी भी लुभावने व विज्ञापनों वाले र्इ-मेल को कम्प्यूटर में नही खोलना चाहिए जिस र्इ-मेल आइडी को नही जानते है उस र्इ-मेल आइडी को नही खोलना चाहिए। नकली और पाइरेटेड सी0 डी0 व डी0वी0डी0 का यूज कम्प्यूटर में नही करना चाहिए। किसी दूसरे कम्प्यूटर की पेन ड्राइव अपने कम्प्यूटर में लगाये तो उसे एन्‍टीवायरस दवारा स्केन कर लेना चहिए। 

how to know windows 32 bit or 64 विंडोज ३२ बिट है या ६४ बिट कैसे जाने



क्‍या है 32 बिट और 64 बिट 
आप तो जानते ही हैं कि कंप्‍यूटर के सारे काम तेजी से करने के लिये ऑपरेटिंग सिस्‍टम के साथ-साथ आपके प्रोसेसर की भी अहम भूमिका होती है और यह इस बात पर निर्भर करती है कि अापका प्रोससर एक बार में कितना डाटा प्रोसेस करता है, यानि कितनी जल्‍दी सूचनाओं का अादान-प्रदान करता है। 

अब बात करते हैं बिट की। बिट (bit) कंप्‍यूटर की मैमोरी की सबसे छोटी ईकाई होती है, जब चार बिट को मिला दिया जाता है तो उसे निब्‍बल (Nibble) कहते हैं यानी 1 निब्‍बल = 4 बिट बाइट (Byte) अौर 8‍ बिट के एक समूह को बाइट कहते हैं। 

यानि 32 बिट के कंप्‍यूटर का प्रोसेसर एक बार में 32 बिट डाटा को प्रोसेस कर सकता है और 64 बिट का प्रोसेसर एक बार में 64 बिट डाटा का प्रोसेसर उससे दुगना डाटा एक बार में प्रोसेस करता है। अब एक अौर बात प्रोसेसर को यह डाटा प्रोसेस करने के लिये रैम की आवश्‍यकता होती है। 32 बिट के कंप्‍यूटर के कंप्‍यूटर में आप 4जीबी तक रैम इस्‍तेमाल कर सकते हैं जबकि 64 बिट के प्रोसेसर को डाटा प्रोसेस करने के लिये ज्‍यादा रैम की अावश्‍यकता होती है।


कैसे जानें कि अापके कंप्‍यूटर कितने बिट का है -
विंडोज xp या 7 में माय कंप्‍यूटर आयकन पर राइट क्लिक करें और प्रॉपर्टीज मेनू दबाएं। अब खुलने वाली स्क्रीन पर ऑपरेटिंग सिस्टम का सिस्टम टाइप देख्‍ािये। वहाॅ आपको पता चलेगा कि आपका सिस्‍टम 32 बिट का है या 64 बिट का। 




Thursday, October 4, 2018

राजपूत के असली वंश की पहचान

एक गांव में प्रतापनेर गद्दी के राजा भेष बदल कर गये और एक दरवाजे पर पडे तख्त पर बैठ गये। गांव राजपूतों का कहा जाता था। सभी अपने अपने नाम के आगे सिंह लगाया करते थे। घर के मर्द सभी खेती किसानी और अपने अपने कामो को करने के लिये गांव से बाहर गये थे। कोई भी दरवाजे पर पानी के लिये भी पूंछने के लिये नही आया। घर की बडी बूढी स्त्रियां बाहर निकली और घूंघट से देखकर फ़िर घर के भीतर चली गयीं,दोपहर तक वे जैसे बैठे थे वैसे ही बैठे रहे। दोपहर को घर के मर्द आये और उनसे पहिचान निकालने की बात की कि कौन और कहां से आये है क्या काम है आदि बातें कीं,जब उनकी कोई पहिचान नही निकली तो उन्होने भी कोई बात करने की रुचि नही ली और अपने अपने अनुसार घर के भीतर ही जाकर भोजन आदि करने के बाद फ़िर अपने अपने कामों को करने के लिये चले गये। राजा साहब शाम को अपने राज्य की तरफ़ प्रस्थान कर गये।
दूसरे दिन वे उसी गांव के पास वाले गांव में गये वहां के लोग भी अपने नाम के आगे सिंह लगाया करते थे। वे एक घर के बाहर पडे तख्त पर जाकर बैठ गये,जैसे ही वे तख्त पर बैठे घर से एक बच्चा निकला और उनके पैर छूकर घर के अन्दर वापस चला गया,घर से एक बुजुर्ग स्त्री निकली और एक दरी तथा तकिया लाकर उस तख्त पर बिछा दी। उसने जब तक दरी और तकिया लगायी तब तक वही बच्चा एक प्लेट में मिठाई और पानी लेकर आया,राजा साहब के आगे रखकर सिर नीचे करके खडा हो गया,राजा साहब ने प्लेट से एक टुकडा मिठाई का उठाया और खाकर पानी पिया और तकिया के सहारे आराम करने की मुद्रा में लेट गये। दोपहर को उस घर के मर्द काम धन्धे से वापस आये तो उन्हे तख्त पर लेटा देखकर घर के लोगों को डांटने लगे कि लकडी के तख्त पर केवल दरी ही क्यों बिछाई कोई गद्दा बिछाना चाहिये था। जल्दी से आकर उन्होने राजा साहब के नीचे गद्दा लगाया और उनके गांव आदि के बारे में कोई बात नही पूंछ कर भोजन के लिये गुहार की कि वे उनके साथ चल कर चौका में भोजन करें। राजा साहब ने उनके साथ चौका में भोजन के लिये पीढा पर बैठ गये और सभी लोगों के सामने भोजन आने का इन्तजार किया जैसे ही सभी लोगों के सामने भोजन की थालियां आ गयीं सभी लोगों ने पहले राजा साहब को भोजन करने के लिये प्रार्थना की,राजा साहब ने भोजन का ग्रास लेकर जैसे ही ग्रहण किया सभी घर के लोगों ने भोजन करना शुरु कर दिया। राजा साहब को भूख तो नही थी लेकिन जानबूझ कर वे काफ़ी समय तक भोजन करते रहे,जब तक उन्होने भोजन किया,तब तक घर के बाकी के मर्द खाना खा चुकने के बाद भी राजा साहब के भोजन को समाप्त करने का इन्तजार करने लगे,राजा साहब ने जैसे ही हाथ धोये,घर के बाकी के मर्दों ने भी अपने अपने हाथ धोकर भोजन समाप्त किया। राजा साहब को तम्बाकू पान और हुक्का आदि के लिये पूंछ कर और राजा साहब के मना करने पर उन लोगों ने उनके आने का कारण पूंछा कि वे कहां से आये है,और क्या काम है,राजा साहब ने अपने को गुप्त रखने के बाद बताया कि वे किसी रिस्ते की तलाश में जो उनकी लडकी के लिये मिले,कोई अच्छा घर और वर मिलने के बाद वे उनसे मिलेंगे,इतना कहकर वे अपने राज्य को वापस चले गये।
तीसरे दिन राजा साहब फ़िर से एक गांव में गये और किसी दरवाजे पर जाकर बैठ गये। उस गांव के लोग भी अपने अपने नामों के आगे सिंह लगाया करते थे। जैसे भी जाकर वे तख्त पर बैठे,दरवाजे पर बैठा एक वृद्ध व्यक्ति उनसे सवाल जबाब करने लगा,उनकी पहिचान को पूंछने लगा,उनकी जाति पांति के बारे में पूंछने लगा। राजा साहब ने अपने को छुपाते हुये कहा कि वे जाति से कोरी है,वह वृद्ध हडक कर बोला कि कोरी को हिम्मत कैसे हुयी कि वह उनके तख्त पर आकर बैठ गया,राजा साहब उसके दरवाजे से उठ कर अपने राज्य को वापस चले गये,उन्होने जबाब कुछ नही दिया।
यह तीनो गांव उन्ही की राज्य में आते थे,और राजपूतों की गद्दी होने के कारण उनकी जिम्मेदारी हुआ करती थी कि वे अपने जाति और बिरादरी के लिये हितों के काम करें। कुछ समय बाद उन्होने उन तीनों गावों के उन्ही लोगों को बुलाया,जिनके दरवाजे पर वे जाकर बैठे थे। उन लोगों ने आकर राजा साहब को देखा तो उनके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गयी। कि यह आदमी तो उनके घर के दरवाजे पर बैठा थ,सभी अपने अपने मन में अपने अपने मन के अनुसार सोचने लगे कि उन्होने क्या क्या बर्ताव उनके साथ किया था। राजा साहब ने भरी सभा में पहले गांव वाले व्यक्ति को बुलाया और पूंछा कि वह अपने नाम के आगे सिंह कैसे लगाने लगा,उस व्यक्ति ने जबाब दिया कि उसके पूर्वज भी सिंह लगाया करते थे इसलिये उसने अपने नाम के आगे सिंह लगाना शुरु किया था। भाटों को बुलाकर उस गांव के इतिहास के बारे में पता लगाया गया,उस गांव की पुरानी नींव वास्तव में किसी राजपूत की ही थी,लेकिन राजपूत रानी के मरने के बाद किसी बेडिनी को घर में घर में बिठा लेने के कारण जो औलाद पैदा हुयी वह बाप के नाम का सिंह तो लगाने लगी लेकिन राजपूती बाना सही नही रख पायी। धीरे धीरे खून के अन्दर ठंडक आने लगी और राजपूती का खून खून को आकर्षित नही कर पाया। फ़लस्वरूप राजा को बिना किसी भोजन पानी के और मान मनुहार के वापस आना पडा,कारण राजपूती खून उन लोगों में होता तो वे अपने खून को पहिचान कर लगाव रखते। दूसरे गांव में राजा साहब गये थे,उस गांव के लोगों ने बिना किसी पूंछताछ के उनकी मान मनुहार की थी,उस गांव की राजपूती प्रथा जैसे पहले थी वैसी ही चली आ रही थी,इसलिये उन लोगों ने जैसा उनके पास था वैसा उनका सत्कार किया। तीसरे गांव में जहां राजा ने अपने को कोरी बताया था,वे लोग वास्तव में बने हुये राजपूत थे,और अन्य जाति का होने के कारण पहले ही जाति पांति के बारे में पूंछने लगे थे।
कहने का तात्पर्य है कि राजपूत केवल सिंह लगाने से नही बना जा सकता है,जो राजपूती खून को अपनी तरफ़ आकर्षित कर सकता है वही सच्चा राजपूत है,अगर राजपूत के घर में कोई बेडिनी शादी के बाद आ गयी है तो वह पता नही किस जाति के खून को घर में लाकर पालने पोषने के बाद सिंह तो लगा देगी लेकिन जो वास्तविक राजपूती खून है उसे कहां से लेकर आयेगी। और आगे चलकर जो सन्तान होगी वह अपने खून को भूलने लगेगी और दूसरे खूनों की तरफ़ आकर्षित होकर भटकने लगेगी